भारतीय रुपया शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया 94.47 प्रति डॉलर के आसपास रहा, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.49 के स्तर पर बंद हुआ था। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की इस मजबूती को विदेशी मुद्रा inflows और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सक्रिय भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है।
भारतीय रुपया क्यों हो रहा है मजबूत?
हाल के दिनों में रुपये को सबसे बड़ा सहारा बड़े विदेशी मुद्रा inflows से मिला है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI से जुड़ी विशेष योजनाओं के जरिए भारत में करीब 136.4 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह आया है। इस अप्रत्याशित रूप से बड़े inflow ने रुपये को संभालने के लिए केंद्रीय बैंक की क्षमता को मजबूत किया है।
3 सितंबर को रुपये ने करीब 10 सप्ताह के उच्च स्तर तक मजबूती दिखाई थी। बाजार में डॉलर की कमजोरी और विदेशी मुद्रा inflows ने रुपये की खरीदारी को बढ़ावा दिया। हालांकि, यह तेजी अभी पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं मानी जा सकती।
RBI की रणनीति से बाजार को मिला सहारा
RBI इस सप्ताह विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय नजर आया है। Reuters के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को भी शुरुआती कारोबार में डॉलर की बिक्री के जरिए रुपये को समर्थन दिया। इस रणनीति की वजह से रुपये ने सप्ताह के दौरान लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है।
इसके साथ ही विदेशी मुद्रा inflows से भारतीय बैंकिंग सिस्टम में रुपये की liquidity भी काफी बढ़ी है। 3 सितंबर तक बैंकिंग सिस्टम में liquidity surplus लगभग ₹9.7 लाख करोड़ तक पहुंच गया था, जो रिकॉर्ड स्तर बताया गया है।
कच्चे तेल की कीमत बनी बड़ी चुनौती
हालांकि भारतीय रुपया फिलहाल मजबूत दिखाई दे रहा है, लेकिन आगे की राह आसान नहीं है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण Brent crude की कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए महंगा तेल डॉलर की मांग बढ़ाकर रुपये पर दबाव डाल सकता है।
इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की दिशा और Federal Reserve की ब्याज दर संबंधी उम्मीदें भी रुपये के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। आने वाले अमेरिकी रोजगार और महंगाई से जुड़े आंकड़े बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
आगे कैसी रह सकती है रुपये की चाल?
फिलहाल बाजार में रुपये को लेकर सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं। मजबूत विदेशी मुद्रा inflows और RBI की सक्रियता ने रुपये को हाल के दबाव से बाहर निकलने में मदद की है। लेकिन कच्चे तेल की कीमत, वैश्विक तनाव, अमेरिकी ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती जैसे जोखिम अभी भी बने हुए हैं।
इसलिए भारतीय रुपया आने वाले दिनों में मजबूत रह सकता है, लेकिन इसकी चाल वैश्विक बाजारों और विदेशी मुद्रा प्रवाह पर काफी निर्भर करेगी। निवेशकों और कारोबारियों की नजर अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और RBI के अगले कदमों पर रहेगी।
















