प्राचीन समय की बात है, एक राजा था जिसका पुत्र अत्यंत दुर्व्यसनी और पाप कर्मों में लिप्त था। राजा ने उसे राज्य से निकाल दिया। जंगल में भटकते हुए वह भूख-प्यास से परेशान था।
एक दिन उसे एक साधु मिले, जिन्होंने उसे सफला एकादशी व्रत करने और भगवान विष्णु की कथा सुनने की सलाह दी। उस युवक ने पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखा और Saphala Ekadashi Vrat Katha का पाठ किया।
भगवान विष्णु की कृपा से उसके सारे पाप नष्ट हो गए। राजा को अपने पुत्र की सच्चाई का ज्ञान हुआ और उसने उसे पुनः राज्य सौंप दिया। तभी से यह माना जाता है कि इस एकादशी की कथा अत्यंत चमत्कारी है।