नेपाल में बाढ़: ग्लेशियर टूटने से 160+ मौतें, सैकड़ों लापता, जानें पूरा अपडेट

By Pradeep.Biswas

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नेपाल में ग्लेशियर टूटने से आई भीषण बाढ़

नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही

नेपाल इन दिनों एक बेहद गंभीर प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। नेपाल-चीन सीमा के पास आई अचानक फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा और नुवाकोट समेत आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिला है। बाढ़ ने सड़कें, पुल, घर, बाजार और बिजली से जुड़ी महत्वपूर्ण संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया है।

ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल में इस आपदा में 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में खोज अभियान चला रहे हैं। पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में सड़क तथा संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण राहत कार्यों में काफी मुश्किलें आ रही हैं।

आखिर कैसे आई इतनी भयानक बाढ़?

शुरुआती जानकारी में इस घटना को भूकंप से जोड़कर देखा गया था। हालांकि, बाद में US Geological Survey (USGS) के विश्लेषण में महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया। USGS के अनुसार शुरुआती तौर पर जिस घटना को 4.4 तीव्रता का भूकंप माना गया था, अतिरिक्त भूकंपीय आंकड़ों और सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन के बाद इसे ग्लेशियर के ढहने और debris flow से जुड़ी घटना बताया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के खिसकने से नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंचा। इसके बाद तेज बहाव ने नीचे की ओर स्थित बस्तियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया।

सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं प्रभावित

नेपाल में बाढ़ का असर केवल आबादी वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा। बाढ़ के तेज बहाव ने कई सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचाया है। Bhotekoshi और Trishuli नदी के रास्ते में आने वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मलबा जमा हुआ है।

कई जगहों पर बिजली परियोजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की खबर है। प्रभावित क्षेत्रों में संचार व्यवस्था और सड़क संपर्क टूटने के कारण राहत सामग्री पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है।

सैकड़ों लोग अभी भी लापता

इस प्राकृतिक आपदा की सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों को लेकर है। नेपाल में स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के भी लापता होने की खबर सामने आई है।

रिपोर्टों के अनुसार लापता लोगों में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े हुए थे। भारत सरकार ने भी नेपाल के राहत अभियान में सहायता भेजी है। भारत की ओर से मानवीय सहायता और जरूरी दवाइयों सहित राहत सामग्री भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

सरकार ने तेज किया राहत और बचाव अभियान

नेपाल सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, घायलों का इलाज कराने और जरूरतमंद परिवारों को भोजन तथा आश्रय उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार ने प्रभावित स्थानीय क्षेत्रों को तीन महीने के लिए आपदा संकट क्षेत्र घोषित करने सहित राहत, पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं की बहाली के लिए कई कदम उठाए हैं।

आगे भी चुनौती बड़ी

विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों और बदलते मौसम से जुड़ी घटनाओं को लेकर पहले से चिंता बढ़ रही है। अचानक आने वाली ऐसी बाढ़ के लिए शुरुआती चेतावनी प्रणाली और सीमापार सूचनाओं का तेज आदान-प्रदान बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाना और क्षतिग्रस्त सड़क, बिजली तथा संचार व्यवस्था को बहाल करना प्रशासन की प्राथमिकता बनी हुई है। आने वाले दिनों में नुकसान और लापता लोगों की संख्या को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

नोट: यह रिपोर्ट 27 अगस्त 2026 तक उपलब्ध ताजा मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। राहत एवं बचाव अभियान जारी होने के कारण मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े बदल सकते हैं।

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